श्रावण मास में दही व कढ़ी का सेवन वर्जित क्यो?
श्रावण मास 2024 : सावन का महीना शिव की पूजा-व्रत के साथ ही कई समस्याओं से मुक्ति के लिए भी उपयोगी माना गया है. इस महीने बेलपत्र चढ़ाना और दूध चढ़ाना शुभ माना जाता है. लेकिन, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन माह में कढ़ी और दही नहीं खानी चाहिए।
श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। धर्माचार्य के अनुसार श्रावण का पूरा महीना भगवान शिव दक्षेश्वर महादेव मंदिर में निवास करते है। भगवान शिव को कच्चा दूध ,गंगाजल व बेलपत्र अत्यधिक प्रिय है । जो भी शिवभक्त भगवान शिव को श्रावण मास में कच्चा दूध बेलपत्र व गंगाजल नित्यप्रति अर्पित करते है। उन पर भगवान शिव की विशेष कृपा होती है। भगवान शिव अपने भक्तों की मनोकामना को पूर्ण करते है।
श्रावण मास में कढ़ी खाना वर्जित धार्मिक मान्यता
धर्म गुरुओ के अनुसार पौराणिक मान्यता है कि सावन मास में भगवान शिव को कच्चा दूध अर्पित किया जाता है। इसलिए इस माह में कच्चा दूध व इससे संबंधित चीजों का सेवन करना वर्जित है। कढ़ी बनाने के लिए दही का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए सावन महीने में कढ़ी या दूध, दही से संबंधित चीजों का खाना वर्जित बताया गया है। क्योंकि भगवान शिव को श्रावण माह में कच्चे दूध से अभिषेक किया जाता है । इसलिए कच्चे दूध व उससे सम्बन्धित खाद्य पदार्थों का सेवन श्रावण मास में नही करना चाहिए।
आयुर्वेद के अनुसार श्रावण मास में दही और कढ़ी वर्जित क्यो ?
आयुर्वेद के अनुसार, सावन मास में दही या दही से बनी किसी भी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इस मास में ऐसा करने से कई बीमारियों जैसे नजला, जुकाम, गले मे खराश, आदि का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही कच्चे दूध का सेवन करना भी इस मास में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता हैं।
उधम टाइम्स इस लेख से सम्बंधित किसी भी विषय की पुष्टि नही करता है धर्मगुरुओं व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जानकारी साझा की गई है।लेख सम्बन्धित सन्तुष्टि अपने आधार पर की जाये